जिला अस्पताल की हकीकत, यहां नहीं है दवाएं मरीज़ों को खाना पढ़ रहे धक्के

Share On :

बदायूं। जिला अस्पताल में मानसिक रोग विशेषज्ञ को छोड़ दें तो बाकी सभी मर्जों के डॉक्टर हैं। जरूरत के हिसाब से यहां डॉक्टरों की तैनाती ज्यादा है, इसके बाद भी मरीजों को समय से इलाज नहीं मिल पा रहा है। वजह है कि अधिकांश डॉक्टर छुट्टी पर रहते हैं तो अस्पताल में संसाधनों के साथ-साथ दवाओं का टोटा भी बना रहता है। खांसी, जुकाम, बुखार के अलावा यहां अन्य बीमारियों की दवाएं नहीं मिलती हैं। ओपीडी में डॉक्टर और स्टाफ के बैठने का समय सुबह आठ बजे निर्धारित है, इसके बाद भी दस बजे से पहले स्टाफ या डॉक्टर यहां नहीं पहुंचते हैं। एक फिजीशियन और एक आर्थो सर्जन के हवाले ही ओपीडी में आने वाले रोजाना लगभग तीन सौ मरीज रहते हैं। सुबह से ही मरीजों की लाइन लगी रहती है, लेकिन डॉक्टर उनको ढूढ़े दिखाई नहीं देते हैं। अधिकांश डॉक्टर बरेली या फिर अपने निजी अस्पतालों में मरीजों को देखने में व्यस्त रहते हैं। मगर, सरकारी सेवा में वह अपना कर्तव्य नहीं निभाते हैं। इससे मरीजों का सरकारी सेवा से मोह भंग होता जा रहा है।

नहीं मिलता दिल का इलाज

जिला अस्पताल में आने वाले सामान्य मरीजों के अलावा गंभीर मरीजों को इलाज नहीं मिल पाता है। हृदय रोग विशेषज्ञ की तैनाती होने के बाद भी यहां दिल के दौरे में प्राथमिक उपचार में दी जाने वाली दवाएं तक यहां मौजूद नहीं हैं। इससे मरीजों की जान पर बन आती है।

ब्लड प्रेशर और मिर्गी दौरा तक की नहीं दवाएं

जिला अस्पताल में ब्लड प्रेशर और मिर्गी के दौरा तक की दवाएं नहीं हैं। मरीजों की संख्या दिन पर दिन बढ़ने के बाद भी इस ओर ध्यान नहीं दिया गया है। अगर किसी मरीज को यहां मिर्गी का दौरा पड़ जाए या फिर उसका ब्लड प्रेशर हाई हो जाए तो उसको निजी अस्पताल के अलावा यहां इलाज नहीं मिलेगा। जबकि बजट हर बीमारी की दवाओं के नाम पर खपा दिया जाता है।

थायराइड का भी नहीं मिलता इलाज

जिला अस्पताल जहां लाखों करोड़ों रुपये हर साल मरीजों के इलाज के नाम पर सरकार पानी की तरह बहाती है, वहां पर थायराइड तक के इलाज की व्यवस्था नहीं है। तीन-तीन जनरल फिजीशियन होने के बाद भी उनके सामने समस्या यही आती है इस बीमारी की दवाएं नहीं हैं।

मलेरिया, टाइफाइड के अलावा नहीं होती कोई और जांच

जिले की इकलौती बड़ी लैब जो जिला अस्पताल में स्थापित है। इस लैब में सभी तरह की जांच होनी चाहिए, संसाधन वहां पर मुहैया हैं और स्टाफ भी भरपूर है। बावजूद इसके मलेरिया, टायफाइड के अलावा कोई और जांच नहीं होती।

24 घंटे में तीन घंटे ही होती है जांच

जिला अस्पताल की इमर्जेंसी 24 घंटे खुलती है, ताकि किसी भी वक्त कोई मरीज आए तो उसका इलाज हो सके। जब इमर्जेंसी चौबीस घंटे खुल रही है तो वहां पर जांच सेंटर भी उतने ही वक्त खुलना चाहिए। स्टाफ पर्याप्त होने के बाद भी महज तीन घंटे ही जांचें होती हैं। इससे मरीजों को और समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

बगैर न्यूरो सर्जन लग रहा सीटी स्कैन

जिले भर में किसी भी अस्पताल में न्यूरो सर्जन या फिर न्यूरा फिजीशियन नहीं है। इसके बाद भी जिला अस्पताल में सीटी स्कैन की मशीन लगाई जा रही है। लाखों रुपये के इस प्रोजेक्ट को जिला अस्पताल किस तरह से संचालित करा पाएगा इसका जवाब किसी के पास नहीं है।

इतने डॉक्टरों की है तैनाती

ईएमओ : छह

फिजीशियन : तीन

ईएनटी सर्जन : तीन

आई सर्जन : दो

रेडियोलॉजिस्ट : एक

आर्थो सर्जन : चार

जनरल सर्जन : दो

पैथोलॉजिस्ट : दो

जिला अस्पताल में जरूरत के हिसाब से दवाएं मौजूद हैं। कुछ बीमारियों की दवाएं वहां नहीं मिल पा रही है या फिर डॉक्टर नहीं बैठ रहे हैं तो इसकी जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी।

डा. नेमी चंद्रा, सीएमओ

loading...
Comments
No comments yet. Be first to leave one!

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Related News