मुशायरा सम्मेलन में देश के विख्यात कवि व शायरों ने जमाया रंग

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बदायूं : शहर में भाजपा के क्षेत्रीय उपाध्यक्ष जितेंद्र कुमार सक्सेना की ओर से आयोजित ऑल इंडिया मुशायरा एवं कवि सम्मेलन में देश के शीर्षस्थ कवियों ने रंग जमाया। मिशन कंपाउंड में सोमवार रात आयोजित कार्यक्रम शाहकार का शुभारंभ मुख्य अतिथि भाजपा के क्षेत्रीय अध्यक्ष बीएल वर्मा ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सत्ताधारी पार्टी की ओर से जुड़ा कार्यक्रम होने की वजह से जिले के अधिकांश विधायक और अधिकारी भी शामिल हुए। बदायूं महोत्सव तो अभी तक नहीं हो सका, लेकिन इस आयोजन से जिले के लोगों को साहित्यिक धारा से जोड़ने का प्रयास किया गया। प्रो.वसीम बरेलवी, डॉ.राहत इंदौरी, जौहर कानपुरी, शबीना अदीब, अज्म शाकिरी, नुसरत मेंहदी, हाशिम नोमानी जैसे कवि और शायर शामिल हुए। कार्यक्रम में भाजपा जिलाध्यक्ष हरीश शाक्य, विधायक महेश चंद्र गुप्ता, राजीव कुमार ¨सह, धर्मेद्र शाक्य, आरके शर्मा, कुशाग्र सागर आदि मौजूद रहे।

यहां आना संयोगवश ही है। यह शकील बदायूंनी की नगरी है। लिहाजा यहां के लोग कवि सम्मेलन व मुशायरे में दिलचस्पी रखते होंगे। अगर श्रोताओं ने तबज्जों दी तो कुछ नया जरूर सुनाकर जाऊंगा। मंच से किस प्रकार से लोगों को जुड़ाव बरकरार रखना है इससे हर कवि वाकिफ होते हैं। एक शेर के साथ अपने बातचीत को विराम देता हूं- हम अपनी जान के दुश्मन को अपनी जान कहते हैं, मुहब्बत की इसी मिट्टी को ¨हदुस्तान कहते हैं, जो यह दीवार का सुराख है, साजिश का हिस्सा है, मगर हम इसको अपने घर का रोशनदान कहते हैं।

राहत इंदौरी।

देश के साथ-साथ विदेशों में भी कई बार मुशायरों में शिरकत की है। लेकिन देश में जिस प्रकार श्रोताओं का प्यार मिलता है वह हमें कुछ नया पढ़ने की प्रेरणा देता है। जिससे श्रोता भी मुशायरे को पूरी शिद्दत से सुनते हैं। जिस प्रकार देश का परिवेश बदल रहा है। चंद लाइनों के माध्यम से सभी को एक संदेश देना चाहता हूं- जीतने का यह हुनर भी आजमाना चाहिए, भाईयों से जंग हो तो हार जाना चाहिए।

जौहर कानपुरी

मैं अपने शेरों के माध्यम से लोगों को मुहब्बत, भाईचारा का संदेश देती हूं, जिस प्रकार लोग एक-दूसरे के जान के दुश्मन बने हुए हैं। उन्हे मुशायरों में जरूर शिरकत करनी चाहिए जिससे उनकी मानसिकता में बदलाव आए। हमारा देश की पहचान संस्कृति है जिसके दूसरे देश के लोग भी कायल हैं। लेकिन कुछ दूषित मानसिकता के लोग संस्कृति पर दाग लगा रहे हैं। महिलाओं पर अत्याचार भी दूषित मानसिकता वाले लोग ही करते हैं। कुछ लाइनें मेरी ओर से – वतन बचाने का वक्त मकां बचाने की फिक्र छोड़ो, मेरे भी हाथों में दे दो तिरंगा मेरे बुजुर्गों हिना से पहले।

शबीना अदीब

तमाम मसअले आयो सुपुर्दे-ए-खाक करें, जमीन मां है, गलत फैसला नहीं करती.. यह शहर महज चंद लाइनें नहीं है बल्कि इस देश में मची संप्रादायिकता की लड़ाई की मिशाल है। कुछ सियासी लोग अपने फायदों के लिए लोगों को बरगलाकर गलत काम करवाते हैं। जिससे देश की छवि धूमिल हो रही है। देश की छवि को बचाने के लिए युवाओं को सशक्त होने की जरूरत है।

हाशिम नोमानी

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