शहरी क्षेत्र में आसरा आवासों से बेदखल होंगे जमींदार, सीडीओ ने दिए आदेश

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बदायूं शहरी क्षेत्र में हर गरीब को पक्की छत दिलाने के लिए सपा सरकार में शुरू हुई आसरा आवास योजना में गड़बड़झाला रोकने के लिए दोबारा से आसरा आवासों का सत्यापन किया जाएगा। ताकि वास्तविक गरीबों को ही इसका लाभ मिल सके। इसके लिए सीडीओ शेषमणि पांडेय ने जिला नगरीय विकास अभिकरण को आदेश दिए हैं। कमेटी सत्यापन रिपोर्ट तैयार कर नियम विरुद्ध आवास हथियाने वालों को बेदखल करेगी। उनकी जगह पर गरीबों को आवास दिए जाएंगे।

समाजवादी सरकार में आसरा आवास योजना का लाभ अधिकांश उन लोगों को दिया गया जो किसी मंत्री, विधायक या फिर नेताओं के करीबी थे। नियम विरुद्ध उनके नाम आवास जारी कर दिए गए जिनके पास शहर में पहले से ही आवास थे। कागजी सत्यापन करने के साथ ही जमीनी हकीकत को नहीं देखा गया। इससे तमाम गरीब परिवारों को निराशा मिली। समय परिवर्तन हुआ और सूबे में भाजपा की सरकार आई तो गरीबों को अपना हक मिलने की उम्मीद भी जाग गई। वह अपने अधिकारों की मांग करते हुए अधिकारियों के यहां चक्कर लगाने लगे। सीडीओ के पास तमाम गरीबों के प्रार्थना पत्र पहुंचे, जिन्होंने कहा कि उनके पास आवास नहीं है और उन्हें आसरा आवास या फिर अन्य सरकारी आवास का लाभ नहीं दिया गया। इस बात पर सीडीओ ने डूडा आफिसर को निर्देश दिए कि कमेटी का गठन कर आवासों का सत्यापन कराया जाए। इसके बाद सत्यापन करने के लिए कमेटी का गठन किया गया। सीडीओ ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि गरीबों को मिलने वाली सहायता पूरी पारदर्शिता के साथ दी जाएगी।

कांशीराम आवासों का भी सत्यापन शुरू

कांशीराम आवासों में अवैध तरीके से रह रहे लोगों को बेदखल कराया जाएगा। कांशीराम आवासों का सत्यापन शुरू हो चुका है। बताया गया है कि तमाम ऐसे लोग जो अवैध तरीके से सियासी आड़ में वहां रह रहे हैं और उनकी दबंगई की बात भी सामने आती है। इससे कालोनियों का माहौल भी खराब हो रहा है। इस वजह से उनका सत्यापन कराया जा रहा है, ताकि उनको बेदखल कर गरीबों को ही आवास दिलाया जा सके।

गरीबों को मिलने वाली सरकारी सहायता में कोई गड़बड़ी बर्दास्त नहीं की जाएगी, जिसका जो हक है वह उसे मिलना चाहिए। सरकारी आवासों का सत्यापन कराया जा रहा है उसमें अवैध रूप से रहने वालों को निकाला जाएगा। गरीबों को उनका हक दिलाया जाएगा। सरकार की मंशा के अनुरूप ही कार्य किया जाएगा।

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